परिचय
पुस्तैनी जमीन वह संपत्ति है जो परिवार के पूर्वजों से विरासत में मिली होती है। कानूनी दृष्टि से इसे अपनी नाम पर दर्ज कराना ज़रूरी है, ताकि भविष्य में संपत्ति विवाद से बचा जा सके।
1. कानूनी आधार
- हिंदू परिवार: Hindu Succession Act, 1956
- अन्य धर्म: संबंधित निजी उत्तराधिकार कानून
- उत्तराधिकारी के हक की पुष्टि केवल पंजीकरण द्वारा होती है।
2. आवश्यक दस्तावेज़
- खसरा/खतौनी की कॉपी
- उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या विरासत प्रमाण पत्र
- पूर्वजों के संपत्ति दस्तावेज़ (पुस्तैनी प्रमाण)
- पहचान पत्र और पता प्रमाण (Aadhar, Voter ID)
3. आवेदन और हलफनामा
- तहसील या जिला भूमि रिकॉर्ड कार्यालय में आवेदन करें।
- हलफनामा (Affidavit) नोटरी से बनवाएँ जिसमें पुस्तैनी हक का उल्लेख हो।
4. दस्तावेज़ जमा करना और नाम पंजीकरण
- सभी दस्तावेज़ तहसील/राजस्व कार्यालय में जमा करें।
- अधिकारी द्वारा जांच के बाद नाम खसरा/खतौनी में दर्ज किया जाएगा।
- नामांतरण प्रमाण पत्र प्राप्त करें।
5. संबंधित कानून
- Hindu Succession Act, 1956 – हिन्दू उत्तराधिकारी कानून
- Registration Act, 1908 – संपत्ति पंजीकरण
- Revenue / Land Records Act – राज्य विशेष भूमि कानून
6. महत्वपूर्ण सुझाव
- विवाद होने पर कानूनी वकील से सलाह लें।
- जमीन का नक्शा और माप प्रमाण पत्र तैयार रखें।
- सभी दस्तावेज़ सही और अपडेटेड होने चाहिए।
निष्कर्ष
पुस्तैनी जमीन पर नाम दर्ज कराना आपके अधिकार की कानूनी पुष्टि है और भविष्य में किसी भी विवाद से सुरक्षा प्रदान करता है। सही दस्तावेज़ और तहसील में आवेदन प्रक्रिया इसे सरल बनाते हैं।
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