पड़ोसी की झूठी पुलिस केस की धमकी: IPC और BNS कानून क्या कहते हैं?

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पड़ोसी की झूठी पुलिस केस की धमकी – IPC और BNS के तहत आपके अधिकार

कई बार पड़ोसी आपसी विवाद में पुलिस केस की धमकी देने लगते हैं। जैसे स्थिति आपने बताई – कि आपका पड़ोसी कह रहा है कि आपका गंदा पानी उसके कुएँ में जा रहा है, जबकि असल में ऐसा नहीं है। ऐसी परिस्थिति में आपके अधिकार और कानूनी उपाय क्या हैं, आइए समझते हैं।

1. झूठे आरोप और IPC के प्रावधान

भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत:

  • धारा 182 IPC – यदि कोई व्यक्ति पुलिस को गलत सूचना देता है जिससे किसी निर्दोष पर कार्यवाही हो सकती है, तो उसे दंड मिल सकता है।
  • धारा 211 IPC – झूठा आरोप लगाना (False Charge) स्वयं एक अपराध है, जिसमें आरोपी को 2 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है (आरोप की गंभीरता पर निर्भर)।
  • धारा 503 IPC – धमकी देना आपराधिक भयादोहन (Criminal Intimidation) कहलाता है।

2. BNS (भारतीय न्याय संहिता, 2023) के तहत प्रावधान

नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी झूठे आरोप और धमकी को अपराध माना गया है:


  • धारा 223 BNS – यदि कोई झूठी जानकारी या शिकायत देकर किसी निर्दोष व्यक्ति को सज़ा दिलवाने की कोशिश करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
  • धारा 351 BNS – आपराधिक भयादोहन (Criminal Intimidation) का प्रावधान, जहाँ धमकी देना दंडनीय है।
  • धारा 353 BNS – किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता को नुकसान पहुँचाने वाली झूठी शिकायत पर सज़ा का प्रावधान है।

3. आपको क्या करना चाहिए?

  1. सबूत सुरक्षित करें – यदि वास्तव में आपका गंदा पानी उनके कुएँ में नहीं जा रहा है, तो फोटो, वीडियो या किसी गवाह के बयान एकत्र करें।
  2. पुलिस में लिखित शिकायत – यदि पड़ोसी लगातार धमकी दे रहा है, तो थाने में लिखित शिकायत करें कि वह झूठा आरोप लगाकर आपको परेशान कर रहा है।
  3. शांति बनाये रखें – झगड़े में उलझने की बजाय कानूनी रास्ता अपनाएँ।
  4. स्थानीय प्रशासन को अवगत कराएँ – पंचायत या नगर निकाय से लिखित प्रमाण लें कि आपका गंदा पानी उनके कुएँ में नहीं जा रहा।
  5. मानहानि का दावा – यदि पड़ोसी की हरकत से आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच रहा है, तो आप मानहानि का केस भी कर सकते हैं।

निष्कर्ष

झूठे आरोप लगाकर पुलिस केस की धमकी देना स्वयं में अपराध है। IPC और नए BNS दोनों में इसके खिलाफ स्पष्ट प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में आपको घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सबूत इकट्ठा कर पुलिस या न्यायालय का सहारा लेना चाहिए।

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