🚘 DWI केस में "The Car Was Not Operable" कैसे बन सकता है डिफ़ेंस?
कई बार पुलिस DWI (Drunk Driving) केस में सिर्फ इस आधार पर चार्ज लगा देती है कि व्यक्ति शराब पीकर गाड़ी में बैठा था। लेकिन DWI कानून का मुख्य आधार यह है कि आरोपी ने गाड़ी चलाई हो या चलाने की स्थिति में हो।
यदि गाड़ी "operable" यानी चलने की स्थिति में ही न हो, तो कोर्ट में यह एक मज़बूत डिफ़ेंस साबित हो सकता है।
🔹 "Operable" का मतलब क्या है?
- गाड़ी स्टार्ट होकर चलने की स्थिति में हो।
- बैटरी, इंजन, या गाड़ी का अन्य सिस्टम सही काम कर रहा हो।
- आरोपी के पास वास्तव में गाड़ी चलाने की क्षमता हो।
अगर गाड़ी खराब थी, बैटरी डाउन थी, टायर पंक्चर था या किसी वजह से इंजन स्टार्ट ही नहीं हो रहा था, तो आरोपी सड़क पर खतरा पैदा करने की स्थिति में नहीं था।
🔹 कोर्ट में यह डिफ़ेंस कैसे काम करता है?
- साबित करना कि गाड़ी नहीं चल सकती थी –
- साबित करना कि आरोपी सिर्फ गाड़ी में बैठा था, चला नहीं रहा था।
- अगर आरोपी नशे में था लेकिन गाड़ी तकनीकी रूप से "inoperable" थी, तो DWI चार्ज कमज़ोर हो जाता है।
🔹 केस स्टडी (उदाहरण)
🔹 क्यों ज़रूरी है यह डिफ़ेंस?
- DWI कानून का उद्देश्य सड़क सुरक्षा है।
- अगर गाड़ी चलने की स्थिति में ही नहीं थी, तो नशे में बैठे व्यक्ति से सड़क पर कोई ख़तरा नहीं था।
- इसलिए कई कोर्ट इस डिफ़ेंस को स्वीकार कर चुकी हैं।
✅ निष्कर्ष
DWI केस में "The car was not operable" एक वैध और मज़बूत डिफ़ेंस है। अगर आरोपी यह साबित कर दे कि गाड़ी चलने की स्थिति में नहीं थी, तो अदालत उसे DWI से बरी कर सकती है।
👉 यह ब्लॉग केवल जानकारी के उद्देश्य से है।
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