NDPS Act केस में दोष स्वीकार करने पर राहत | सोनभद्र कोर्ट फैसला 2025

indianlawfact
0



NDPS केस में दोष स्वीकार करने पर अदालत का मानवीय दृष्टिकोण

(State vs. मो. आज़ाद अली, जिला न्यायालय सोनभद्र, 17-12-2025)

भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में कई ऐसे मामले होते हैं जो वर्षों तक लंबित रहते हैं। ऐसा ही एक मामला जिला एवं सत्र न्यायालय, सोनभद्र के समक्ष आया, जहाँ NDPS Act के तहत अभियुक्त पर अवैध गांजा रखने का आरोप था।


🔹 मामले का संक्षिप्त विवरण

पुलिस के अनुसार 30 अक्टूबर 2018 को अभियुक्त मो. आज़ाद अली के कब्ज़े से 2 किलो 100 ग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके आधार पर थाना शक्तिनगर में NDPS Act की धारा 8/20 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया।

🔹 मुकदमे की स्थिति

यह मामला वर्ष 2019 से लंबित था। अभियोजन द्वारा अब तक केवल दो गवाहों की ही जाँच हो पाई थी, जिससे यह स्पष्ट था कि मुकदमे का निपटारा शीघ्र संभव नहीं है।

🔹 अभियुक्त की स्वीकारोक्ति

अभियुक्त ने स्वेच्छा से अदालत के समक्ष दोष स्वीकार करते हुए कहा कि वह अत्यंत गरीब है, पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने में असमर्थ है।

🔹 न्यायालय का दृष्टिकोण

अदालत ने न केवल कानून को देखा, बल्कि अभियुक्त की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पहले से काटी गई जेल अवधि और मुकदमे की लंबी अवधि को भी ध्यान में रखा।

🔹 अंतिम निर्णय

न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए:

  • पहले से जेल में बिताई गई अवधि को सजा माना

  • ₹5,500 का अर्थदंड लगाया

यह निर्णय यह दर्शाता है कि न्याय केवल दंड देना नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार संतुलन बनाना भी है।

🔹 निष्कर्ष

यह फैसला बताता है कि जब अभियुक्त स्वेच्छा से अपराध स्वीकार करता है और मामला लंबे समय से लंबित हो, तो अदालत न्यूनतम दंड के सिद्धांत को अपनाकर न्याय कर सकती है।


2️⃣ FAQ (आम सवाल-जवाब)

Q1. अभियुक्त को कितनी सजा हुई?
👉 पहले से काटी गई जेल अवधि + ₹5,500 जुर्माना।

Q2. जुर्माना न देने पर क्या होगा?
👉 3 महीने का अतिरिक्त कारावास।

Q3. क्या यह NDPS Act का गंभीर अपराध था?
👉 मात्रा छोटी (2.1 किग्रा) थी, इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया।

Q4. दोष स्वीकार करने का क्या लाभ हुआ?
👉 लंबी सुनवाई से बचाव और न्यूनतम सजा।

Q5. जब्त गांजे का क्या होगा?
👉 अपील अवधि के बाद नियमानुसार नष्ट किया जाएगा।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !
close