Kaushal Kishore v. State of U.P. (2025) – सरकार द्वारा ज़मीन लेने पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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Kaushal Kishore v. State of U.P. (2025) – पूर्ण केस व्याख्या

(सरकारी सड़क निर्माण, मुआवज़ा और भूमि-अधिग्रहण प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला)

मामले की पृष्ठभूमि

Kaushal Kishore नामक व्यक्ति की हरदोई जिले में थोड़ी सी पैतृक ज़मीन थी। स्थानीय प्रशासन ने सड़क निर्माण के लिए उसकी भूमि का एक हिस्सा ले लिया। लेकिन:



  • न कोई पूर्व सूचना दी गई,
  • न कोई भूमि-अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया,
  • और न ही कोई उचित मुआवज़ा दिया गया।

भूमि का उपयोग सीधे सड़क के लिए कर लिया गया और कहा गया कि यह “सार्वजनिक हित” में है।

इससे नाराज़ होकर Kaushal Kishore ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।


⚖️ मुख्य कानूनी प्रश्न

  • क्या सरकार बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए किसी नागरिक की भूमि ले सकती है?
  • क्या सार्वजनिक उपयोग (Public Purpose) दिखाकर ज़मीन लेना वैध माना जाएगा?
  • भूमि मालिक को उचित मुआवज़ा न देना क्या Article 300A (Right to Property) का उल्लंघन है?


🏛️ हाई कोर्ट का निर्णय (2025)

हाई कोर्ट ने इस मामले में नागरिक के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

1️⃣ सरकार “पब्लिक पर्पज़” के नाम पर ज़मीन नहीं ले सकती

कोर्ट ने कहा कि कानून की निर्धारित प्रक्रिया (Due Process) अपनाना अनिवार्य है।
यहां LARR Act, 2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था।

2️⃣ भूमि मालिक को पूर्व सूचना देना आवश्यक है

भूमि अधिग्रहण से पहले:

  • नोटिस
  • सर्वे
  • आपत्ति सुनवाई
  • सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA)

आदि जरूरी थे। प्रशासन ने कुछ भी नहीं किया।

3️⃣ मुआवज़ा न देना असंवैधानिक है

Article 300A के अनुसार "बिना कानूनी अधिकार के किसी को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता"।

4️⃣ सरकार को आदेश — उचित मुआवज़ा + ब्याज दे

कोर्ट ने निर्देश दिया:

  • भूमि का मूल्य मार्केट रेट के अनुसार तय किया जाए
  • LARR Act के तहत 100% सोलैटियम दिया जाए
  • देरी पर ब्याज भी दिया जाए


📝 कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

  • “सार्वजनिक हित” का अर्थ यह नहीं है कि सरकार नागरिकों के अधिकारों का हनन करे।
  • सड़क बनाना वैध कार्य है, लेकिन भूमि लेना हमेशा ‘कानूनी प्रक्रिया’ के तहत ही होगा
  • किसी भी नागरिक की संपत्ति उसे उसके अधिकार सहित वापस या मुआवज़े के साथ ही मिल सकती है।


इस फैसले का महत्व

यह फैसला आने वाले कई मामलों के लिए मार्गदर्शक है:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बिना प्रक्रिया भूमि लेने पर रोक
  • मुआवज़ा तय करने की पारदर्शिता
  • प्रशासनिक मनमानी पर न्यायिक नियंत्रण
  • भूमि-अधिग्रहण कानून (LARR Act 2013) को मजबूती

निष्कर्ष

यह निर्णय नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाला एक ऐतिहासिक फैसला है। अदालत ने दिखाया कि चाहे सरकारी काम कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि हैं और सरकार के हर कदम को कानून के दायरे में रहकर ही उठाया जाना चाहिए।

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