BNSS 2023 की धारा 223: FIR के बिना भी कैसे शुरू होता है क्रिमिनल ट्रायल? (कम्प्लेंट केस की पूरी प्रक्रिया)

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  1. क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि पुलिस ने आपकी शिकायत लिखने से मना कर दिया हो?
  2. अब कानून बदल चुका है। BNSS 2023 ने आम नागरिक को यह ताकत दी है कि वह सीधे अदालत जाकर न्याय मांग सके।

क्रिमिनल केस ट्रायल की पूरी प्रक्रिया

कम्प्लेंट केस (परिवाद) – BNSS 2023 की धारा 223 के तहत

प्रस्तावना

1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) ने आपराधिक कानून की दिशा ही बदल दी है।
अब न्याय पाने के लिए हर बार पुलिस थाने के चक्कर काटना ज़रूरी नहीं रहा।

पहले आम आदमी पुलिस पर पूरी तरह निर्भर था।
अब कानून ने यह अधिकार दिया है कि अगर पुलिस सुनवाई नहीं करती, तो नागरिक सीधे अदालत जा सकता है।


इसी व्यवस्था को कहा जाता है — कम्प्लेंट केस (परिवाद मामला)
जो BNSS की धारा 223 के तहत सीधे कोर्ट में दाखिल किया जाता है।

यह लेख आपको आसान भाषा में बताएगा कि:

  • FIR न होने पर क्या करें
  • कोर्ट में सीधा केस कैसे चलता है
  • और पूरा ट्रायल कैसे पूरा होता है


1. कम्प्लेंट केस (परिवाद) क्या होता है?

कम्प्लेंट केस वह आपराधिक मामला होता है जिसमें:

  • पुलिस थाने में FIR दर्ज नहीं होती
  • पीड़ित व्यक्ति खुद कोर्ट जाकर शिकायत करता है

अगर:

  • पुलिस रिपोर्ट लिखने से मना कर दे
  • या जानबूझकर कार्रवाई न करे

तो BNSS की धारा 223 के अनुसार,
पीड़ित व्यक्ति सीधे मजिस्ट्रेट के सामने अपनी बात रख सकता है।


2. FIR केस और कम्प्लेंट केस में फर्क (आसान शब्दों में)

बातFIR केसकम्प्लेंट केस
केस की शुरुआतपुलिस थाने सेसीधे कोर्ट से
जांच कौन करता हैपहले पुलिसपहले मजिस्ट्रेट
नियंत्रण किसकापुलिस काकोर्ट का
पीड़ित की भूमिकासीमितबहुत सक्रिय

👉 मतलब: कम्प्लेंट केस में पीड़ित खुद न्याय की प्रक्रिया का हिस्सा होता है।


3. BNSS की धारा 223 क्यों लाई गई?

इस धारा का मकसद है:

  • पुलिस की लापरवाही से पीड़ित व्यक्ति को न्याय देना
  • कोर्ट को शुरुआत से मजबूत बनाना
  • झूठे मामलों को छाँटना
  • असली पीड़ित को जल्दी राहत देना

सीधे शब्दों में —
“अगर पुलिस रास्ता रोक दे, तो अदालत का दरवाज़ा खुला है।”


4. कम्प्लेंट केस कैसे दाखिल किया जाता है?

(i) शिकायत कैसे लिखी जाती है?

शिकायत में ये बातें ज़रूरी होती हैं:

  • शिकायतकर्ता का नाम और पता
  • आरोपी कौन है
  • घटना कब, कहाँ और कैसे हुई
  • कौन-सा अपराध हुआ
  • क्या सबूत हैं
  • शपथपत्र (हलफनामा)


(ii) शिकायत कहाँ दी जाती है?

यह शिकायत:

  • न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी
  • या सक्षम मजिस्ट्रेट

के सामने पेश की जाती है।


5. मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता का बयान क्यों लेता है?

मजिस्ट्रेट:

  • शिकायतकर्ता का शपथ पर बयान दर्ज करता है
  • कागज़ात देखता है
  • यह जांचता है कि वाकई कोई अपराध हुआ है या नहीं

👉 यह कोर्ट का सुरक्षा फ़िल्टर है, ताकि झूठे केस आगे न बढ़ें।


6. गवाहों का बयान

अगर शिकायतकर्ता गवाह लाता है, तो:

  • मजिस्ट्रेट उनके बयान भी दर्ज करता है
  • यह देखा जाता है कि गवाह भरोसेमंद हैं या नहीं


7. मजिस्ट्रेट के पास तीन रास्ते होते हैं

प्रारंभिक जांच के बाद मजिस्ट्रेट:

(a) शिकायत खारिज कर सकता है

अगर मामला बनता ही नहीं।

(b) आरोपी को समन भेज सकता है

अगर अपराध दिखाई देता है।

(c) पुलिस जांच का आदेश दे सकता है

कुछ मामलों में सीमित जांच के लिए।


8. आरोपी को कोर्ट बुलाना (Summon)

जब मजिस्ट्रेट संतुष्ट हो जाता है कि:

  • अपराध हुआ है
  • सबूत मौजूद हैं

तो आरोपी को:

  • समन
  • या वारंट

जारी किया जाता है।


9. आरोपी कोर्ट में आने के बाद

जब आरोपी कोर्ट में पेश होता है:

  • उसे बताया जाता है कि आरोप क्या हैं
  • जमानत का फैसला होता है
  • आगे की तारीख तय होती है


10. आरोप तय होना (Charge Framing)

मजिस्ट्रेट यह देखता है कि:

  • मुकदमा चलाने लायक सबूत हैं या नहीं

अगर हाँ, तो:

  • आरोप तय किए जाते हैं
  • और असली ट्रायल शुरू होता है


11. शिकायतकर्ता पक्ष के सबूत

इस चरण में:

  • गवाहों के बयान होते हैं
  • दस्तावेज़ पेश होते हैं
  • आरोपी पक्ष जिरह करता है


12. आरोपी का बयान

आरोपी को मौका दिया जाता है कि:

  • वह अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपनी बात रखे


13. बचाव पक्ष के सबूत

अगर आरोपी चाहे, तो:

  • अपने गवाह
  • अपने दस्तावेज़

पेश कर सकता है।


14. अंतिम बहस

दोनों पक्ष:

  • कानून
  • सबूत
  • पुराने फैसलों

के आधार पर अपनी आख़िरी दलीलें रखते हैं।


15. फैसला (Judgment)

मजिस्ट्रेट फैसला देता है:

  • दोषी है → सजा
  • दोषी नहीं → बरी


16. सजा

अगर दोषी पाया गया, तो:

  • जेल
  • जुर्माना
  • या अन्य आदेश

दिए जाते हैं।


17. अपील का अधिकार

BNSS के तहत:

  • दोषी व्यक्ति
  • और कुछ मामलों में शिकायतकर्ता

उच्च अदालत में अपील कर सकते हैं।


18. कम्प्लेंट केस की खास बातें

  • FIR ज़रूरी नहीं
  • कोर्ट की सीधी निगरानी
  • पीड़ित की मजबूत भूमिका
  • पुलिस की मनमानी पर रोक


निष्कर्ष

BNSS 2023 की धारा 223 ने आम आदमी को एक नया कानूनी हथियार दिया है।

अब न्याय केवल थाने से नहीं,
अदालत से भी शुरू होता है।

अगर पुलिस आपकी आवाज़ नहीं सुनती,
तो कानून कहता है —
कोर्ट आपके लिए खुला है।

अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे शेयर करें।
कानून तभी ताकत बनता है जब आम आदमी उसे समझे।

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