🔴 क्रिमिनल केस ट्रायल की पूरी प्रक्रिया
FIR से लेकर जजमेंट, अपील और दया याचिका तक – सरल और विस्तृत कानूनी मार्गदर्शिका
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में क्रिमिनल केस ट्रायल एक लंबी लेकिन सुनियोजित प्रक्रिया है। आम नागरिकों, पीड़ितों और आरोपियों—तीनों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून ने हर चरण के लिए स्पष्ट प्रावधान किए हैं।
इस लेख में हम केवल पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर आधारित क्रिमिनल केस ट्रायल की पूरी प्रक्रिया को तीन भागों में समझेंगे—
- चार्जशीट से पहले – पुलिस जांच (Investigation Stage)
- कोर्ट में ट्रायल (Trial Stage)
- जजमेंट के बाद – अपील, दया याचिका और अन्य उपाय
📌 क्रिमिनल केस ट्रायल के प्रकार
क्रिमिनल केस मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—
- FIR आधारित केस – जो पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर चलते हैं
- कम्प्लेंट केस (परिवाद) – जो BNSS की धारा 223 के तहत सीधे कोर्ट में दाखिल होते हैं
👉 इस लेख में हम केवल FIR आधारित केस ट्रायल पर चर्चा कर रहे हैं।
🔷 भाग – 1
FIR से चार्जशीट तक (Police Investigation – BNSS)
1️⃣ अपराध की सूचना और FIR
- पीड़ित और सूचनाकर्ता अलग-अलग हो सकते हैं
- पुलिस स्वयं भी शिकायतकर्ता हो सकती है
- गुप्त सूचना (Source Information) पर भी FIR दर्ज हो सकती है
2️⃣ गिरफ्तारी और तलाशी (BNSS)
यदि अपराध संज्ञेय है तो पुलिस—
- धारा 35 BNSS – बिना वारंट गिरफ्तारी
- धारा 51 BNSS – आरोपी की तलाशी
- धारा 105 BNSS – स्थान की तलाशी
- जप्त सामान की सूची देना अनिवार्य
📌 गिरफ्तारी की सूचना आरोपी के रिश्तेदार/मित्र को देना अनिवार्य
3️⃣ मेडिकल परीक्षण
- BNSS धारा 51, 52, 183 – मेडिकल एग्ज़ामिनेशन
- BNS धारा 93 – जीवन रक्षा हेतु डॉक्टर बिना सहमति इलाज कर सकता है
4️⃣ जमानत या मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी
- जमानतीय अपराध → पुलिस स्टेशन से जमानत
- गैर-जमानतीय अपराध → 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
5️⃣ अग्रिम जमानत और नियमित जमानत
- BNSS धारा 482 – अग्रिम जमानत
- BNSS धारा 479, 480 – नियमित जमानत
- BNSS धारा 483(2) – जमानत निरस्तीकरण
6️⃣ पुलिस जांच और चार्जशीट
Investigating Officer (IO)—
- घटनास्थल का नक्शा
- गवाहों के बयान
- मेडिकल / FSL रिपोर्ट
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (Call, CCTV, Mobile Data)
⏳ चार्जशीट की समय सीमा (BNSS)
- 60 दिन – सामान्य अपराध
- 90 दिन –
- मृत्यु
- आजीवन कारावास
- 10 वर्ष से अधिक सजा
🔷 भाग – 2
कोर्ट में क्रिमिनल केस ट्रायल (BNSS)
1️⃣ डिस्चार्ज या चार्ज फ्रेम
- BNSS धारा 250 / 262 – डिस्चार्ज
- BNSS धारा 239 – चार्ज फ्रेम
- कोर्ट गलत धाराएँ बदल सकती है
यदि आरोपी अपराध स्वीकार कर ले →
👉 उसी समय सजा
2️⃣ गवाही (Evidence Stage – Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023)
- अभियोजन गवाह → PW
- बचाव गवाह → DW
📌 धारा 137, 138 BSA –
मुख्य परीक्षण, जिरह और पुनः परीक्षण
⚠️ गवाह का अपमान या चरित्र हनन निषिद्ध
3️⃣ होस्टाइल गवाह
- धारा 154 BSA – अभियोजन स्वयं जिरह कर सकता है
4️⃣ अंतिम बहस
- मौखिक और लिखित दोनों
- डिजिटल लिखित तर्क को मान्यता
5️⃣ जजमेंट
- BNSS धारा 392 – निर्णय
- दोषमुक्त (Acquittal) या दोषसिद्ध (Conviction)
🔷 भाग – 3
सजा, अपील और दया याचिका (BNSS)
⚖️ मृत्युदंड
- सेशन कोर्ट का निर्णय
- हाई कोर्ट से पुष्टि अनिवार्य
📑 अपील
- BNSS धारा 413 – अपील
- पीड़ित को भी अपील का अधिकार
⏱️ अपील की समय सीमा—
- मृत्यु दंड → 30 दिन
- अन्य सजा → 30–90 दिन
🕊️ दया याचिका (Mercy Petition)
- अनुच्छेद 72 – राष्ट्रपति
- अनुच्छेद 161 – राज्यपाल
अब राज्यपाल को भी मृत्यु दंड पर विचार का अधिकार
🔁 Review और Curative Petition
- Review – अनुच्छेद 137
- Curative – Rupa Ashok Hurra केस
- 👉 अंतिम संवैधानिक उपाय
⚠️ ट्रायल के दौरान विशेष प्रावधान
हाजिरी माफी
- BNSS धारा 317 – अस्थायी
- BNSS धारा 205 – स्थायी छूट
ट्रायल के बीच केस खत्म करने के उपाय
- BNSS धारा 359 – समझौता (Compounding)
- BNSS धारा 289 – Plea Bargaining
- (7 वर्ष तक के अपराध)
📌 निष्कर्ष
BNS और BNSS 2023 ने क्रिमिनल ट्रायल को—
- अधिक डिजिटल
- पीड़ित-केंद्रित
- समयबद्ध
- और पारदर्शी
बनाने का प्रयास किया है।

