Appointment of Arbitrator (Sections 12–15) in Hindi
Grounds of Challenge, Disclosure, Termination & Substitution | Complete Guide | Case Laws | Practical Examples | LLB Notes | Judiciary Notes
Updated 2026 | Arbitration and Conciliation Act, 1996 | Indian Law Fact
प्रस्तावना
मध्यस्थता (Arbitration) आज के समय में व्यावसायिक, निर्माण, बैंकिंग, अवसंरचना (Infrastructure), साझेदारी, सेवा अनुबंध (Service Contracts) तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े विवादों के समाधान का एक प्रभावी और विश्वसनीय माध्यम बन चुकी है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विवाद का निपटारा सामान्य न्यायालयों के बजाय पक्षकारों द्वारा चुने गए एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष Arbitrator के माध्यम से अपेक्षाकृत कम समय और कम औपचारिकताओं के साथ किया जाता है।
किन्तु Arbitration की पूरी व्यवस्था तभी सफल मानी जा सकती है जब Arbitrator किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत, आर्थिक या व्यावसायिक प्रभाव से मुक्त होकर निर्णय दे। यदि Arbitrator की निष्पक्षता या स्वतंत्रता पर उचित संदेह उत्पन्न हो जाए, तो पूरी Arbitration प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि Arbitration and Conciliation Act, 1996 में Arbitrator की नियुक्ति के साथ-साथ उसकी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
धारा 12 से 15 इसी उद्देश्य को पूरा करती हैं। इन धाराओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि Arbitrator अपनी नियुक्ति स्वीकार करने से पहले उन सभी परिस्थितियों का खुलासा (Disclosure) करे, जो उसकी स्वतंत्रता या निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि किसी पक्षकार को लगता है कि Arbitrator के हितों का टकराव (Conflict of Interest) है या वह निष्पक्ष निर्णय देने की स्थिति में नहीं है, तो उसे कानून के अनुसार चुनौती (Challenge) दी जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर उसका Mandate समाप्त कर नया Arbitrator भी नियुक्त किया जा सकता है।
वर्ष 2015 के संशोधन ने इन प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाया। इसी संशोधन के माध्यम से Fifth Schedule और Seventh Schedule को अधिनियम में जोड़ा गया, जिनका उद्देश्य Arbitrator की निष्पक्षता के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित करना था। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने TRF Ltd., Perkins Eastman, Bharat Broadband तथा Voestalpine जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में इन सिद्धांतों को और मजबूत किया तथा यह स्पष्ट किया कि Arbitration में निष्पक्षता केवल आदर्श नहीं बल्कि विधिक आवश्यकता है।
यह अध्याय Sections 12 से 15 का क्रमबद्ध एवं व्यावहारिक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें प्रत्येक धारा की सरल व्याख्या, प्रमुख न्यायिक निर्णय, वास्तविक जीवन के उदाहरण, Drafting Tips, परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु तथा LLB एवं Judiciary अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी नोट्स सम्मिलित किए गए हैं। यदि आप Arbitration Law को केवल Bare Act तक सीमित न रखकर उसके व्यावहारिक स्वरूप को समझना चाहते हैं, तो यह अध्याय आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।
📌 Quick Summary
इस अध्याय में हम Arbitration and Conciliation Act, 1996 की Sections 12 से 15 का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इन धाराओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Arbitrator पूरी कार्यवाही के दौरान स्वतंत्र, निष्पक्ष और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव से मुक्त रहे।
इस भाग में निम्नलिखित विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी—
- Section 12 – Arbitrator द्वारा अनिवार्य Disclosure तथा Challenge के आधार।
- Section 13 – Arbitrator को चुनौती देने की वैधानिक प्रक्रिया।
- Section 14 – किन परिस्थितियों में Arbitrator का Mandate समाप्त हो जाता है।
- Section 15 – Mandate समाप्त होने के बाद नए Arbitrator की नियुक्ति की प्रक्रिया।
- Fifth Schedule एवं Seventh Schedule का महत्व तथा दोनों के बीच का अंतर।
- Arbitrator की Independence और Impartiality से संबंधित प्रमुख सिद्धांत।
- TRF Ltd., Perkins Eastman, Bharat Broadband तथा Voestalpine जैसे महत्वपूर्ण Supreme Court के निर्णय।
- व्यावहारिक उदाहरण (Practical Illustrations) एवं Contract Drafting से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव।
- LLB, Judiciary, APO, NET तथा अन्य विधि परीक्षाओं के लिए उपयोगी नोट्स और संभावित प्रश्न।
इस अध्याय का उद्देश्य केवल Bare Act की भाषा समझाना नहीं है, बल्कि यह बताना भी है कि वास्तविक Arbitration Proceedings में इन धाराओं का प्रयोग किस प्रकार किया जाता है और न्यायालयों ने समय-समय पर इनका क्या अर्थ निर्धारित किया है।
⭐ Key Takeaways
इस अध्याय का अध्ययन करने के बाद आप निम्नलिखित महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझ पाएँगे—
✔ Arbitration की निष्पक्षता का आधार Arbitrator की Independence और Impartiality है।
✔ प्रत्येक प्रस्तावित Arbitrator को नियुक्ति स्वीकार करने से पहले संभावित Conflict of Interest से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का लिखित Disclosure देना अनिवार्य है।
✔ यदि Arbitrator की निष्पक्षता पर उचित संदेह उत्पन्न होता है, तो उसे Section 12 एवं Section 13 के अंतर्गत विधिसम्मत प्रक्रिया द्वारा Challenge किया जा सकता है।
✔ Fifth Schedule संभावित Bias से संबंधित परिस्थितियों को दर्शाती है, जबकि Seventh Schedule ऐसी परिस्थितियों का उल्लेख करती है जिनमें कोई व्यक्ति Arbitrator बनने के लिए विधिक रूप से अयोग्य माना जाता है।
✔ यदि Arbitrator मृत्यु, बीमारी, इस्तीफा, कानूनी अयोग्यता या अन्य कारणों से अपना कार्य जारी रखने में असमर्थ हो जाता है, तो उसका Mandate Section 14 के अंतर्गत समाप्त किया जा सकता है।
✔ Mandate समाप्त होने की स्थिति में Section 15 के अनुसार उसी प्रक्रिया का पालन करते हुए नए Arbitrator की नियुक्ति की जाती है, जिसके माध्यम से मूल Arbitrator नियुक्त हुआ था।
✔ सर्वोच्च न्यायालय ने TRF Ltd., Perkins Eastman, Bharat Broadband तथा Voestalpine मामलों में स्पष्ट किया है कि Arbitration की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब Arbitrator वास्तव में निष्पक्ष और स्वतंत्र हो।
✔ प्रत्येक अधिवक्ता, विधि छात्र, न्यायिक सेवा अभ्यर्थी तथा Commercial Contract Drafting करने वाले पेशेवर के लिए Sections 12–15 की गहन समझ अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही प्रावधान Arbitration प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता का मूल आधार हैं।
Section 12 – Grounds of Challenge & Disclosure (धारा 12 : प्रकटीकरण एवं चुनौती के आधार)
Arbitration and Conciliation Act, 1996
Section 12 – परिचय
Arbitration की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि पक्षकारों ने न्यायालय के स्थान पर मध्यस्थता (Arbitration) का विकल्प चुना है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि विवाद का निर्णय करने वाला Arbitrator पूर्णतः स्वतंत्र (Independent), निष्पक्ष (Impartial) तथा किसी भी प्रकार के हितों के टकराव (Conflict of Interest) से मुक्त हो।
इसी उद्देश्य से Arbitration and Conciliation Act, 1996 की Section 12 एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह धारा सुनिश्चित करती है कि Arbitrator बनने से पहले प्रस्तावित व्यक्ति उन सभी तथ्यों का खुलासा (Disclosure) करे जो उसकी निष्पक्षता या स्वतंत्रता पर उचित संदेह उत्पन्न कर सकते हैं।
सरल शब्दों में कहा जाए तो Section 12 Arbitration की निष्पक्षता की पहली सुरक्षा (First Safeguard) है। यदि Arbitrator प्रारंभ से ही निष्पक्ष नहीं है, तो पूरी Arbitration प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
Section 12 का उद्देश्य
धारा 12 का मूल उद्देश्य Arbitration प्रक्रिया में विश्वास, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना है। यह केवल पक्षकारों के अधिकारों की रक्षा नहीं करती, बल्कि Arbitration संस्था की विश्वसनीयता को भी मजबूत बनाती है।
इस धारा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- Arbitrator की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।
- संभावित हितों के टकराव को पहले ही सामने लाना।
- पक्षकारों को सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने का अवसर देना।
- पक्षपात की संभावना को समाप्त करना।
- Arbitration Award की वैधता और विश्वसनीयता बनाए रखना।
Disclosure (प्रकटीकरण) क्या है?
Disclosure का अर्थ है कि Arbitrator बनने के लिए प्रस्तावित व्यक्ति अपनी नियुक्ति स्वीकार करने से पहले लिखित रूप में उन सभी परिस्थितियों की जानकारी दे, जो उसकी निष्पक्षता या स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं।
यह केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक वैधानिक दायित्व (Statutory Duty) है।
यदि किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाया जाता है और बाद में उसका पता चलता है, तो यह Arbitrator के विरुद्ध Challenge का आधार बन सकता है।
Arbitrator को क्या-क्या बताना आवश्यक है?
धारा 12 के अंतर्गत Arbitrator को विशेष रूप से निम्नलिखित परिस्थितियों का खुलासा करना चाहिए—
1. व्यक्तिगत संबंध (Personal Relationship)
यदि किसी पक्षकार, उसके निदेशक, साझेदार या प्रमुख अधिकारी से पारिवारिक अथवा घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध हो।
2. व्यावसायिक संबंध (Business Relationship)
यदि Arbitrator किसी पक्ष के साथ व्यापार, साझेदारी, परामर्श या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में जुड़ा रहा हो।
3. आर्थिक हित (Financial Interest)
यदि Arbitrator का किसी पक्ष की कंपनी में निवेश, शेयर, लाभांश या अन्य आर्थिक हित हो।
4. पूर्व नियुक्तियाँ
यदि किसी एक पक्ष ने बार-बार उसी Arbitrator की नियुक्ति की हो, तो इसका भी खुलासा आवश्यक है।
लगातार एक ही पक्ष द्वारा नियुक्त किया जाना निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न कर सकता है।
5. अन्य परिस्थितियाँ
ऐसी कोई भी परिस्थिति, जिससे एक सामान्य एवं निष्पक्ष व्यक्ति को यह प्रतीत हो कि Arbitrator पूर्णतः स्वतंत्र नहीं है।
Independence और Impartiality में अंतर
दोनों शब्द साथ-साथ प्रयुक्त होते हैं, लेकिन उनका अर्थ अलग है।
Independence (स्वतंत्रता)
इसका संबंध Arbitrator और पक्षकारों के बीच मौजूद संबंधों से है।
यदि Arbitrator किसी पक्ष से आर्थिक, व्यावसायिक या व्यक्तिगत रूप से जुड़ा है, तो उसकी Independence प्रभावित मानी जा सकती है।
Impartiality (निष्पक्षता)
इसका संबंध Arbitrator की मानसिक निष्पक्षता से है।
यदि Arbitrator किसी पक्ष के प्रति पूर्वाग्रह रखता है या पहले से कोई राय बना चुका है, तो उसकी Impartiality प्रभावित हो सकती है।
Challenge के आधार
धारा 12 के अनुसार Arbitrator को निम्न परिस्थितियों में चुनौती दी जा सकती है—
(1) Bias (पक्षपात)
यदि यह प्रतीत हो कि Arbitrator किसी एक पक्ष का समर्थन कर रहा है।
(2) Lack of Independence
यदि Arbitrator किसी पक्ष का कर्मचारी, सलाहकार, ऑडिटर या व्यावसायिक सहयोगी हो।
(3) Lack of Impartiality
यदि उसके पूर्व व्यवहार से यह स्पष्ट हो कि वह निष्पक्ष निर्णय देने की स्थिति में नहीं है।
(4) Conflict of Interest
जब Arbitrator का व्यक्तिगत लाभ विवाद के परिणाम से जुड़ा हो।
(5) Qualification का अभाव
यदि Arbitration Agreement में विशेष योग्यता निर्धारित की गई हो और नियुक्त व्यक्ति वह योग्यता पूरी न करता हो।
Section 12(5) का महत्व
2015 के संशोधन के बाद जोड़ी गई Section 12(5) Arbitration कानून की सबसे महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है।
इस उपधारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति Seventh Schedule में वर्णित किसी भी श्रेणी में आता है, तो वह सामान्यतः Arbitrator बनने के लिए अयोग्य (Ineligible) माना जाएगा।
यह नियम Arbitration की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
हालाँकि, विवाद उत्पन्न होने के बाद दोनों पक्ष स्पष्ट लिखित सहमति (Express Written Agreement) देकर इस अयोग्यता का परित्याग (Waiver) कर सकते हैं।
Fifth Schedule का महत्व
Fifth Schedule ऐसी परिस्थितियों की सूची प्रदान करती है जिनसे Arbitrator की निष्पक्षता पर उचित संदेह उत्पन्न हो सकता है।
इन परिस्थितियों में नियुक्ति स्वतः अवैध नहीं होती, लेकिन चुनौती दी जा सकती है।
उदाहरण
- पूर्व कानूनी सलाहकार
- नियमित व्यवसायिक संबंध
- बार-बार नियुक्ति
- निकट पारिवारिक संबंध
- आर्थिक निर्भरता
Seventh Schedule का महत्व
Seventh Schedule उन परिस्थितियों का उल्लेख करती है जिनमें व्यक्ति Arbitrator बनने के लिए विधिक रूप से अयोग्य माना जाता है।
उदाहरण
- वर्तमान कर्मचारी
- Managing Director
- Partner
- प्रत्यक्ष आर्थिक हित रखने वाला व्यक्ति
- ऐसा व्यक्ति जिसका विवाद के परिणाम में सीधा हित हो
ऐसी स्थिति में नियुक्ति प्रारम्भ से ही दोषपूर्ण मानी जा सकती है।
Fifth Schedule एवं Seventh Schedule में अंतर
| आधार | Fifth Schedule | Seventh Schedule |
|---|---|---|
| उद्देश्य | संभावित Bias दर्शाना | पूर्ण अयोग्यता निर्धारित करना |
| परिणाम | Challenge किया जा सकता है | Arbitrator सामान्यतः नियुक्त नहीं हो सकता |
| प्रभाव | Tribunal विचार करेगा | नियुक्ति कानून के विरुद्ध हो सकती है |
| Waiver | सामान्य नियम लागू | केवल विवाद के बाद स्पष्ट लिखित सहमति से |
Practical Example – 1
ABC Ltd. और XYZ Ltd. के बीच निर्माण अनुबंध का विवाद उत्पन्न हुआ।
ABC Ltd. ने अपने लंबे समय से कार्यरत कानूनी सलाहकार को Arbitrator नियुक्त कर दिया।
XYZ Ltd. ने आपत्ति उठाई कि वह व्यक्ति वर्षों से ABC का प्रतिनिधित्व करता रहा है।
ऐसी स्थिति में Section 12 के अंतर्गत Disclosure तथा Challenge का प्रश्न उत्पन्न होगा और तथ्य यह निर्धारित करेंगे कि मामला Fifth Schedule के अंतर्गत आता है या Seventh Schedule के।
Practical Example – 2
एक बैंक और उधारकर्ता के बीच ऋण विवाद चल रहा है।
बैंक अपने वर्तमान महाप्रबंधक (General Manager) को Arbitrator नियुक्त करता है।
क्योंकि वह बैंक का वर्तमान अधिकारी है, उसकी निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठ सकते हैं और नियुक्ति Seventh Schedule के संदर्भ में परखी जाएगी।
Practical Example – 3
Arbitrator नियुक्ति के समय यह नहीं बताता कि उसके परिवार का एक सदस्य विवादित कंपनी में निदेशक है।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित पक्ष Section 12 के आधार पर Arbitrator को चुनौती दे सकता है।
महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
1. TRF Ltd. v. Energo Engineering Projects Ltd. (2017)
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति स्वयं Arbitrator बनने के लिए अयोग्य है, वह किसी अन्य Arbitrator की नियुक्ति का अधिकार भी नहीं रखता। इस निर्णय ने निष्पक्ष नियुक्ति के सिद्धांत को सुदृढ़ किया।
2. Perkins Eastman Architects DPC v. HSCC (India) Ltd. (2019)
न्यायालय ने कहा कि यदि केवल एक पक्ष को Arbitrator नियुक्त करने का विशेष अधिकार दिया गया है, तो ऐसी व्यवस्था निष्पक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
3. Bharat Broadband Network Ltd. v. United Telecoms Ltd. (2019)
इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने Section 12(5) और Seventh Schedule की अनिवार्यता पर बल दिया तथा स्पष्ट किया कि अयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति को चुनौती दी जा सकती है।
4. Voestalpine Schienen GmbH v. DMRC (2017)
न्यायालय ने कहा कि Arbitration की सफलता के लिए Arbitrator का वास्तव में स्वतंत्र और निष्पक्ष होना आवश्यक है। केवल औपचारिक निष्पक्षता पर्याप्त नहीं है; ऐसी परिस्थितियाँ भी नहीं होनी चाहिएँ जिनसे निष्पक्षता पर उचित संदेह उत्पन्न हो।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- Section 12 Arbitration की निष्पक्षता का मूल प्रावधान है।
- Disclosure लिखित रूप में किया जाना चाहिए।
- Independence और Impartiality अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।
- Fifth Schedule संभावित हितों के टकराव से संबंधित है।
- Seventh Schedule विधिक अयोग्यता निर्धारित करती है।
- Section 12(5) का उद्देश्य निष्पक्ष Arbitrator सुनिश्चित करना है।
- TRF Ltd., Perkins Eastman और Bharat Broadband के निर्णय अक्सर LLB, Judiciary तथा Competitive Exams में पूछे जाते हैं।
Section 13 – Challenge Procedure (धारा 13 : Arbitrator को चुनौती देने की प्रक्रिया)
Arbitration and Conciliation Act, 1996
Updated 2026 | Indian Law Fact
परिचय
Arbitration की पूरी प्रक्रिया इस सिद्धांत पर आधारित है कि विवाद का निर्णय एक स्वतंत्र (Independent) और निष्पक्ष (Impartial) Arbitrator द्वारा किया जाएगा। यदि किसी पक्षकार को यह उचित आधार पर प्रतीत होता है कि नियुक्त Arbitrator निष्पक्ष नहीं है या उसके हितों का किसी पक्ष से टकराव (Conflict of Interest) है, तो केवल संदेह व्यक्त करना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे मामलों में कानून एक निर्धारित प्रक्रिया प्रदान करता है, जिसके माध्यम से Arbitrator को चुनौती (Challenge) दी जा सकती है।
इसी प्रक्रिया का विस्तृत प्रावधान Arbitration and Conciliation Act, 1996 की Section 13 में किया गया है।
धारा 13 यह सुनिश्चित करती है कि Arbitrator के विरुद्ध उठाई गई आपत्ति का निर्णय पहले Arbitration Tribunal स्वयं करे। इसका उद्देश्य यह है कि प्रत्येक छोटे विवाद के लिए न्यायालय का दरवाज़ा न खटखटाना पड़े और Arbitration की गति तथा दक्षता बनी रहे।
Section 13 का उद्देश्य
Section 13 का मुख्य उद्देश्य Arbitrator को चुनौती देने के लिए एक न्यायसंगत, व्यवस्थित और समयबद्ध प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
इस धारा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- Arbitration की निष्पक्षता बनाए रखना।
- Arbitrator के विरुद्ध मनमानी या दुर्भावनापूर्ण आपत्तियों को रोकना।
- Arbitration Proceedings में अनावश्यक विलंब से बचना।
- न्यायालयों के अनावश्यक हस्तक्षेप को सीमित रखना।
- यदि वास्तविक पक्षपात हो तो उसे विधिसम्मत तरीके से दूर करना।
Challenge कब किया जा सकता है?
Section 13 को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि Challenge के आधार Section 12 से प्राप्त होते हैं।
सामान्यतः निम्न परिस्थितियों में Arbitrator को चुनौती दी जा सकती है—
- Arbitrator ने आवश्यक Disclosure नहीं किया।
- उसकी निष्पक्षता पर उचित संदेह हो।
- उसका किसी पक्ष से आर्थिक या व्यावसायिक संबंध हो।
- Arbitration Agreement में निर्धारित योग्यता उसके पास न हो।
- Fifth Schedule अथवा Seventh Schedule से संबंधित परिस्थितियाँ मौजूद हों।
Challenge की प्रक्रिया (Step by Step)
धारा 13 के अंतर्गत Arbitrator को चुनौती देने की प्रक्रिया निम्न प्रकार से होती है—
Step 1 – Challenge के आधार की जानकारी होना
सबसे पहले संबंधित पक्षकार को यह जानकारी प्राप्त होती है कि Arbitrator के विरुद्ध कोई वैधानिक आधार मौजूद है।
यह जानकारी—
- Disclosure Statement से,
- दस्तावेज़ों से,
- किसी सार्वजनिक रिकॉर्ड से,
- या कार्यवाही के दौरान प्राप्त हो सकती है।
उदाहरण
सुनवाई के दौरान यह ज्ञात होता है कि Arbitrator पहले प्रतिवादी कंपनी का कानूनी सलाहकार रह चुका है।
Step 2 – लिखित Challenge Notice देना
यदि पक्षकार Challenge करना चाहता है, तो उसे लिखित रूप में अपना आपत्ति-पत्र (Challenge Statement) प्रस्तुत करना होता है।
इस Notice में सामान्यतः निम्न बातें होती हैं—
- Challenge का आधार
- संबंधित तथ्य
- उपलब्ध दस्तावेज़
- कानूनी प्रावधान
- मांगी गई राहत
केवल मौखिक आपत्ति पर्याप्त नहीं होती।
Step 3 – Tribunal द्वारा विचार
Challenge प्राप्त होने के बाद Arbitral Tribunal उस पर विचार करता है।
यदि Arbitrator स्वयं यह महसूस करता है कि Challenge उचित है, तो वह—
- स्वयं हट सकता है (Recusal), अथवा
- पक्षकार आपसी सहमति से नया Arbitrator नियुक्त कर सकते हैं।
यदि ऐसा नहीं होता, तो Tribunal Challenge पर निर्णय देता है।
Step 4 – Challenge स्वीकार या अस्वीकार
यदि Challenge स्वीकार हो जाए
- Arbitrator का Mandate समाप्त हो सकता है।
- Section 15 के अनुसार नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा।
यदि Challenge अस्वीकार हो जाए
- वही Arbitrator Arbitration जारी रखेगा।
- कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ेगी।
Step 5 – Award पारित होना
यदि Challenge अस्वीकार हो जाता है, तो Arbitration रुकती नहीं है।
Tribunal पूरी सुनवाई करेगा और अंतिम Award पारित करेगा।
Step 6 – Section 34 के अंतर्गत चुनौती
यदि असंतुष्ट पक्षकार को अब भी लगता है कि Arbitrator निष्पक्ष नहीं था, तो वह सीधे बीच में Court नहीं जा सकता।
उसे Award पारित होने की प्रतीक्षा करनी होगी और उसके बाद Section 34 के अंतर्गत Award को चुनौती देनी होगी।
यह Arbitration कानून की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसका उद्देश्य अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप को रोकना है।
Challenge की समय-सीमा
Section 13(2) के अनुसार यदि पक्षकार ने पहले से कोई अलग प्रक्रिया निर्धारित नहीं की है, तो उसे—
- Tribunal के गठन की जानकारी मिलने के बाद, अथवा
- Challenge के आधार की जानकारी मिलने के 15 दिनों के भीतर
अपना Challenge प्रस्तुत करना चाहिए।
यदि पक्षकार अनावश्यक देरी करता है, तो उसका अधिकार प्रभावित हो सकता है।
क्या Challenge के दौरान Arbitration रुक जाती है?
नहीं।
यह Section 13 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।
यदि Challenge लंबित है और Tribunal उसे अस्वीकार कर देता है, तो Arbitration सामान्य रूप से चलती रहती है।
Award पारित होने के बाद ही Court में चुनौती दी जाती है।
इससे Arbitration में अनावश्यक विलंब नहीं होता।
यदि Arbitrator स्वयं हट जाए
कई बार Challenge प्राप्त होने के बाद Arbitrator स्वयं यह महसूस करता है कि विवाद की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पद छोड़ देना उचित होगा।
इसे सामान्यतः Recusal कहा जाता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि Recusal का अर्थ यह नहीं होता कि Arbitrator ने आरोप स्वीकार कर लिया है।
अक्सर यह केवल Arbitration की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
Practical Example – 1
ABC Ltd. और XYZ Ltd. के बीच निर्माण अनुबंध का विवाद चल रहा है।
सुनवाई के दौरान XYZ को पता चलता है कि Arbitrator पिछले पाँच वर्षों तक ABC Ltd. के लिए Tax Consultant के रूप में कार्य कर चुका है।
XYZ लिखित Challenge प्रस्तुत करता है।
Tribunal तथ्यों पर विचार करता है।
यदि Challenge स्वीकार होता है, तो नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा।
Practical Example – 2
एक बैंक ऋण विवाद में बैंक ने पूर्व से कार्यरत Panel Arbitrator नियुक्त किया।
उधारकर्ता ने केवल इस आधार पर Challenge किया कि Arbitrator बैंक के विरुद्ध पहले कोई निर्णय नहीं दे चुका है।
Tribunal ने पाया कि केवल यह तथ्य Bias सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
Challenge अस्वीकार कर दिया गया और Arbitration जारी रही।
Practical Example – 3
Arbitrator ने Disclosure में यह उल्लेख नहीं किया कि उसकी पत्नी विवादित कंपनी में Director है।
यह तथ्य बाद में सामने आया।
दूसरे पक्ष ने तत्काल Challenge किया।
ऐसी स्थिति में Tribunal इस तथ्य की गंभीरता का मूल्यांकन करेगा और आवश्यक होने पर Arbitrator को हटाया जा सकता है।
Challenge के दौरान पक्षकारों की जिम्मेदारी
Challenge करते समय पक्षकार को—
- सही तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए।
- पर्याप्त साक्ष्य देना चाहिए।
- दुर्भावना से Challenge नहीं करना चाहिए।
- केवल कार्यवाही में देरी करने के उद्देश्य से आपत्ति नहीं उठानी चाहिए।
इसी प्रकार Arbitrator का दायित्व है कि वह Challenge पर निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाए और आवश्यक होने पर स्वयं पद छोड़ने में संकोच न करे।
महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
1. HRD Corporation v. GAIL (India) Ltd. (2018)
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Fifth Schedule और Seventh Schedule का उद्देश्य Arbitration की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। न्यायालय ने यह भी बताया कि संभावित Bias और वास्तविक विधिक अयोग्यता में अंतर समझना आवश्यक है।
2. Bharat Broadband Network Ltd. v. United Telecoms Ltd. (2019)
न्यायालय ने कहा कि Section 12(5) के अंतर्गत अयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति को चुनौती दी जा सकती है और Seventh Schedule का पालन अनिवार्य है।
3. Perkins Eastman Architects DPC v. HSCC (India) Ltd. (2019)
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि यदि Arbitrator की नियुक्ति की पूरी शक्ति केवल एक पक्ष के पास है, तो निष्पक्षता पर उचित संदेह उत्पन्न हो सकता है।
Drafting Tips
Arbitration Agreement बनाते समय—
✔ Challenge Procedure स्पष्ट रखें।
✔ Arbitrator के Disclosure की बाध्यता का उल्लेख करें।
✔ Fifth एवं Seventh Schedule का संदर्भ जोड़ें।
✔ Challenge की समय-सीमा का पालन करें।
✔ संस्थागत Arbitration होने पर संबंधित संस्थान के नियमों का भी उल्लेख करें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
❌ बिना किसी साक्ष्य के Bias का आरोप लगाना।
❌ Challenge की समय-सीमा समाप्त होने के बाद आपत्ति करना।
❌ केवल Arbitration में देरी करने के उद्देश्य से Challenge दायर करना।
❌ Arbitrator के Disclosure को ध्यान से न पढ़ना।
❌ Section 13 की प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे Court चले जाना।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या Arbitrator को किसी भी समय Challenge किया जा सकता है?
यदि Challenge का आधार बाद में पता चलता है, तो जानकारी मिलने के बाद यथाशीघ्र Challenge किया जाना चाहिए। कानून समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा करता है।
क्या Challenge करते ही Arbitration रुक जाती है?
नहीं। सामान्यतः Arbitration जारी रहती है।
यदि Tribunal Challenge अस्वीकार कर दे तो क्या होगा?
Arbitration जारी रहेगी और अंतिम Award पारित होने के बाद Section 34 के अंतर्गत न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
क्या Arbitrator स्वयं पद छोड़ सकता है?
हाँ। यदि उसे लगे कि उसकी निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो गया है, तो वह स्वयं हट सकता है।
Judiciary & LLB Exam Notes
याद रखने योग्य तथ्य
- Section 13 → Arbitrator को Challenge करने की प्रक्रिया।
- Challenge के आधार → Section 12।
- सामान्य समय-सीमा → 15 दिन।
- Challenge पहले Tribunal के समक्ष जाता है।
- Challenge अस्वीकार होने पर Arbitration जारी रहती है।
- अंतिम Award के बाद Section 34 के अंतर्गत न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
- HRD Corporation, Perkins Eastman और Bharat Broadband के निर्णय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न
- Section 13 के अंतर्गत Arbitrator को Challenge करने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
- Challenge की समय-सीमा क्या है?
- क्या Challenge लंबित रहने पर Arbitration रुक जाती है?
- Tribunal द्वारा Challenge अस्वीकार किए जाने पर पक्षकार के पास क्या उपाय उपलब्ध है?
- HRD Corporation v. GAIL (India) Ltd. निर्णय का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Section 14 – Failure or Impossibility to Act (धारा 14 : Arbitrator का कार्य करने में असफल या असमर्थ होना)
Section 14 – परिचय
Arbitration का मूल उद्देश्य विवाद का शीघ्र, निष्पक्ष और प्रभावी समाधान करना है। किंतु व्यवहार में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं, जब नियुक्त Arbitrator अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखने में सक्षम नहीं रह जाता। ऐसी स्थिति में यदि Arbitrator को पद पर बनाए रखा जाए, तो पूरी Arbitration प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और पक्षकारों को अनावश्यक विलंब तथा अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए Arbitration and Conciliation Act, 1996 की Section 14 यह निर्धारित करती है कि किन परिस्थितियों में Arbitrator का Mandate (अधिकार एवं दायित्व) स्वतः समाप्त हो जाएगा और यदि इस विषय में विवाद उत्पन्न हो तो न्यायालय की भूमिका क्या होगी।
सरल शब्दों में कहा जाए तो Section 14 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई Arbitrator कानूनन या व्यवहारिक रूप से अपना कार्य करने में असमर्थ हो जाए, तो Arbitration अनिश्चितकाल तक रुकी न रहे और उसके स्थान पर आवश्यक कदम समय पर उठाए जा सकें।
Section 14 का उद्देश्य
धारा 14 का मुख्य उद्देश्य Arbitration Proceedings को अनावश्यक रूप से लंबित होने से रोकना है।
इस धारा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
Arbitration की निरंतरता बनाए रखना।
निष्पक्ष एवं सक्षम Arbitrator सुनिश्चित करना।
अनावश्यक विलंब से बचाना।
पक्षकारों के समय एवं धन की रक्षा करना।
आवश्यकता पड़ने पर नए Arbitrator की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करना।
Mandate का अर्थ क्या है?
Mandate से आशय उस विधिक अधिकार एवं दायित्व से है जिसके आधार पर Arbitrator Arbitration Proceedings संचालित करता है और अंततः Award पारित करता है।
जब किसी Arbitrator का Mandate समाप्त हो जाता है, तब वह आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने का अधिकारी नहीं रहता।
Section 14 कब लागू होती है?
Section 14 मुख्यतः दो परिस्थितियों में लागू होती है—
1. De Jure Inability (कानूनी असमर्थता)
जब कोई व्यक्ति कानून के अनुसार Arbitrator बने रहने का अधिकार खो देता है।
उदाहरण
Section 12(5) के अंतर्गत अयोग्यता सिद्ध होना।
Seventh Schedule के अंतर्गत आ जाना।
किसी वैधानिक प्रावधान के कारण पद पर बने रहना असंभव होना।
2. De Facto Inability (वास्तविक असमर्थता)
जब Arbitrator व्यवहारिक रूप से अपना कार्य करने में सक्षम नहीं रहता।
उदाहरण
गंभीर बीमारी
दुर्घटना
मृत्यु
मानसिक अक्षमता
लंबे समय तक विदेश में रहना और कार्यवाही न कर पाना
कार्य करने से स्पष्ट इंकार करना
किन परिस्थितियों में Mandate समाप्त हो सकता है?
Section 14 के अंतर्गत निम्न परिस्थितियाँ महत्वपूर्ण मानी जाती हैं—
1. मृत्यु (Death)
यदि Arbitrator का निधन हो जाता है, तो उसका Mandate स्वतः समाप्त हो जाता है।
उदाहरण
Construction Arbitration के दौरान Sole Arbitrator की मृत्यु हो जाती है।
अब Section 15 के अनुसार नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा।
2. गंभीर बीमारी (Serious Illness)
यदि Arbitrator ऐसी बीमारी से ग्रस्त हो जाए कि सुनवाई करना संभव न हो।
उदाहरण
Arbitrator को पक्षाघात (Paralysis) हो गया और वह कई महीनों तक कार्य करने में असमर्थ है।
3. इस्तीफा (Resignation)
Arbitrator स्वयं भी पद छोड़ सकता है।
ध्यान रहे—
इस्तीफा देने का अर्थ यह नहीं है कि उसने Challenge स्वीकार कर लिया।
कई बार वह केवल निष्पक्षता बनाए रखने या व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ता है।
4. कार्य करने से इंकार
यदि Arbitrator बिना उचित कारण सुनवाई करने से इंकार कर दे या लगातार अनुपस्थित रहे।
5. अत्यधिक विलंब
Arbitration का उद्देश्य शीघ्र न्याय है।
यदि Arbitrator बिना उचित कारण वर्षों तक कार्यवाही लंबित रखे, तो यह Section 14 का विषय बन सकता है।
6. कानूनी अयोग्यता
यदि बाद में पता चले कि Arbitrator वास्तव में नियुक्ति के समय ही अयोग्य था या बाद में अयोग्य हो गया।
"Fails to Act Without Undue Delay" का अर्थ
Section 14 में प्रयुक्त यह शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसका आशय है—
यदि Arbitrator बिना उचित कारण के लगातार देरी करता है और Arbitration को आगे नहीं बढ़ाता, तो उसका Mandate समाप्त किया जा सकता है।
उदाहरण
लगातार सुनवाई स्थगित करना।
महीनों तक आदेश सुरक्षित रखना।
पक्षकारों के पत्रों का उत्तर न देना।
Evidence Recording में अनावश्यक विलंब करना।
यदि विवाद हो तो क्या होगा?
कई बार दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं होते कि Arbitrator वास्तव में कार्य करने में असमर्थ है या नहीं।
ऐसी स्थिति में—
कोई भी पक्ष उचित न्यायालय (Court) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
न्यायालय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह निर्णय करेगा कि Mandate समाप्त किया जाना चाहिए या नहीं।
क्या Arbitrator का इस्तीफा देने से आरोप सिद्ध हो जाते हैं?
नहीं।
Section 14 स्पष्ट करती है कि—
यदि Arbitrator स्वयं पद छोड़ देता है अथवा पक्षकार उसकी नियुक्ति समाप्त करने पर सहमत हो जाते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसके विरुद्ध लगाए गए आरोप स्वतः सिद्ध हो गए।
यह सिद्धांत Arbitration की गरिमा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
Section 14 और Section 13 में अंतर
| आधार | Section 13 | Section 14 |
|---|---|---|
| उद्देश्य | Challenge Procedure | Mandate समाप्त करना |
| कारण | Bias, Independence, Qualification | मृत्यु, बीमारी, कानूनी या वास्तविक असमर्थता |
| निर्णय | Tribunal | आवश्यक होने पर Court |
| परिणाम | Challenge स्वीकार या अस्वीकार | Mandate समाप्त |
Practical Example – 1
ABC Ltd. और XYZ Ltd. के बीच ₹50 करोड़ का Construction Dispute चल रहा है।
सुनवाई के दौरान Arbitrator को गंभीर हृदयाघात हो जाता है और डॉक्टर छह महीने तक पूर्ण विश्राम की सलाह देते हैं।
दोनों पक्ष सहमत हैं कि Arbitration लंबित नहीं रहनी चाहिए।
ऐसी स्थिति में Arbitrator का Mandate समाप्त होगा और Section 15 के अनुसार नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा।
Practical Example – 2
एक Sole Arbitrator लगातार 18 महीनों तक कोई सुनवाई निर्धारित नहीं करता।
बार-बार अनुरोध के बावजूद वह कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाता।
ऐसी परिस्थिति में प्रभावित पक्ष न्यायालय से Mandate समाप्त करने की मांग कर सकता है।
Practical Example – 3
Arbitrator के विरुद्ध बाद में यह तथ्य सामने आता है कि वह नियुक्ति के समय ही Seventh Schedule के अंतर्गत अयोग्य था।
अब उसका Mandate जारी नहीं रह सकता।
महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
1. HRD Corporation v. GAIL (India) Ltd. (2018)
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Section 12, Section 13 और Section 14 का उद्देश्य Arbitration की निष्पक्षता और प्रभावशीलता बनाए रखना है। न्यायालय ने यह भी बताया कि वास्तविक अयोग्यता और केवल संभावित Bias में अंतर किया जाना चाहिए।
2. Bharat Broadband Network Ltd. v. United Telecoms Ltd. (2019)
न्यायालय ने माना कि यदि Arbitrator Section 12(5) तथा Seventh Schedule के कारण अयोग्य है, तो उसका Mandate जारी नहीं रह सकता।
3. Perkins Eastman Architects DPC v. HSCC (India) Ltd. (2019)
इस निर्णय ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष Arbitrator Arbitration की मूल आवश्यकता है और यदि नियुक्ति की प्रक्रिया ही पक्षपातपूर्ण हो, तो Mandate प्रभावित हो सकता है।
Drafting Tips
Arbitration Clause तैयार करते समय—
✅ Replacement Mechanism अवश्य लिखें।
✅ Arbitrator के इस्तीफे की स्थिति स्पष्ट करें।
✅ Delay से संबंधित प्रावधान जोड़ें।
✅ Sole Arbitrator के स्थान पर Substitute Arbitrator नियुक्त करने की प्रक्रिया स्पष्ट रखें।
✅ Institutional Arbitration होने पर संबंधित Rules का उल्लेख करें।
Common Drafting Mistakes
❌ Replacement Clause न लिखना।
❌ Delay होने पर कोई समाधान न देना।
❌ Mandate समाप्त होने की प्रक्रिया स्पष्ट न करना।
❌ केवल Arbitrator की नियुक्ति लिखना, लेकिन उसके हटने की व्यवस्था न करना।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या Arbitrator की मृत्यु होने पर Arbitration समाप्त हो जाती है?
नहीं। केवल उसका Mandate समाप्त होता है। Section 15 के अनुसार नया Arbitrator नियुक्त किया जाता है।
क्या गंभीर बीमारी Mandate समाप्त करने का आधार है?
हाँ, यदि बीमारी के कारण Arbitrator अपना कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर सकता।
क्या Arbitrator स्वयं इस्तीफा दे सकता है?
हाँ। वह व्यक्तिगत, स्वास्थ्य या अन्य उचित कारणों से पद छोड़ सकता है।
क्या केवल देरी होने से Mandate समाप्त किया जा सकता है?
यदि देरी अनुचित (Undue Delay) है और उससे Arbitration प्रभावित हो रही है, तो परिस्थितियों के आधार पर Section 14 लागू हो सकती है।
Judiciary & LLB Exam Notes
याद रखने योग्य तथ्य
Section 14 → Failure or Impossibility to Act.
दो प्रमुख आधार → De Jure Inability एवं De Facto Inability।
मृत्यु, बीमारी, इस्तीफा, कानूनी अयोग्यता, अत्यधिक देरी—Mandate समाप्त होने के सामान्य आधार हैं।
Mandate समाप्त होने के बाद Section 15 लागू होती है।
Bharat Broadband (2019) परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न
Section 14 के अंतर्गत Arbitrator का Mandate किन परिस्थितियों में समाप्त होता है?
De Jure Inability एवं De Facto Inability में अंतर स्पष्ट कीजिए।
"Fails to Act Without Undue Delay" का क्या अर्थ है?
Arbitrator के इस्तीफे का विधिक प्रभाव क्या होता है?
Section 14 और Section 15 में क्या अंतर है?
Section 15 – Termination of Mandate and Substitution of Arbitrator (धारा 15 : Arbitrator के Mandate की समाप्ति एवं नए Arbitrator की नियुक्ति)
Section 15 – परिचय
Arbitration की सफलता केवल एक योग्य Arbitrator की नियुक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि यदि किसी कारणवश वह Arbitrator अपना कार्य पूरा नहीं कर पाता, तो आगे की प्रक्रिया बिना अनावश्यक विलंब के कैसे जारी रहे।
व्यवहार में कई बार ऐसा होता है कि Arbitrator की मृत्यु हो जाती है, वह स्वास्थ्य कारणों से कार्य करने में असमर्थ हो जाता है, इस्तीफा दे देता है, या किसी कानूनी कारण से उसका Mandate समाप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि नए Arbitrator की नियुक्ति की स्पष्ट व्यवस्था न हो, तो पूरी Arbitration प्रक्रिया रुक सकती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए Arbitration and Conciliation Act, 1996 की Section 15 यह निर्धारित करती है कि Arbitrator का Mandate समाप्त होने के बाद नए Arbitrator (Substitute Arbitrator) की नियुक्ति किस प्रकार की जाएगी और पहले की गई कार्यवाही का क्या प्रभाव होगा।
यह धारा Arbitration की निरंतरता (Continuity) सुनिश्चित करती है और यह सुनिश्चित करती है कि केवल Arbitrator के बदल जाने से पूरी प्रक्रिया प्रारम्भ से शुरू करना आवश्यक न हो।
Section 15 का उद्देश्य
Section 15 का मुख्य उद्देश्य Arbitration Proceedings को बाधित होने से बचाना है।
इस धारा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- Mandate समाप्त होने के बाद नए Arbitrator की नियुक्ति सुनिश्चित करना।
- Arbitration को अनावश्यक रूप से पुनः प्रारम्भ होने से बचाना।
- पक्षकारों के समय एवं व्यय की रक्षा करना।
- नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना।
- Arbitration की निरंतरता बनाए रखना।
Section 15 कब लागू होती है?
Section 15 तब लागू होती है जब किसी Arbitrator का Mandate निम्न कारणों से समाप्त हो जाता है—
- Section 13 के अंतर्गत Challenge स्वीकार हो जाए।
- Section 14 के अंतर्गत मृत्यु, बीमारी, इस्तीफा या कानूनी अयोग्यता हो।
- Arbitrator स्वयं पद छोड़ दे।
- पक्षकार आपसी सहमति से Mandate समाप्त कर दें।
Substitute Arbitrator क्या होता है?
जब मूल Arbitrator किसी कारणवश कार्य जारी नहीं रख सकता और उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है, तो उसे Substitute Arbitrator कहा जाता है।
Substitute Arbitrator मूल Arbitrator का उत्तराधिकारी होता है और शेष Arbitration Proceedings को आगे बढ़ाता है।
नया Arbitrator कैसे नियुक्त किया जाएगा?
Section 15(2) का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि—
जिस प्रक्रिया से मूल Arbitrator नियुक्त किया गया था, सामान्यतः उसी प्रक्रिया से नए Arbitrator की नियुक्ति की जाएगी।
इसे Rule of Same Appointment Procedure कहा जाता है।
उदाहरण 1
Agreement में लिखा है कि दोनों पक्ष एक-एक Arbitrator नियुक्त करेंगे।
यदि एक Arbitrator इस्तीफा दे देता है, तो उसी पक्ष को नया Arbitrator नियुक्त करने का अधिकार होगा।
उदाहरण 2
यदि मूल Arbitrator की नियुक्ति High Court द्वारा Section 11 के अंतर्गत की गई थी, तो आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय से Substitute Arbitrator नियुक्त कराने का अनुरोध किया जा सकता है।
क्या पूरी Arbitration दोबारा शुरू होगी?
यह प्रश्न व्यवहार में सबसे अधिक पूछा जाता है।
उत्तर है— आवश्यक नहीं।
Section 15(3) के अनुसार नया Arbitrator पहले की कार्यवाही को ध्यान में रख सकता है।
यदि परिस्थितियाँ अनुमति दें, तो वह—
- पहले दर्ज साक्ष्य (Evidence) स्वीकार कर सकता है।
- पूर्व आदेशों पर विचार कर सकता है।
- जहाँ से कार्यवाही रुकी थी, वहीं से आगे बढ़ सकता है।
हालाँकि, यदि न्याय के हित में आवश्यक हो, तो वह किसी गवाह से पुनः जिरह (Cross-Examination) या पुनः सुनवाई भी कर सकता है।
क्या पहले के आदेश वैध रहते हैं?
हाँ।
Section 15(4) के अनुसार, जब तक नया Arbitrator उन्हें बदलने का कोई उचित कारण न पाए, पहले Arbitrator द्वारा पारित प्रक्रियात्मक आदेश (Procedural Orders) सामान्यतः प्रभावी बने रहते हैं।
इसका उद्देश्य दोबारा समय और संसाधनों की बर्बादी रोकना है।
क्या नया Arbitrator पूरी स्वतंत्रता रखता है?
हाँ, लेकिन सीमाओं के साथ।
Substitute Arbitrator—
- रिकॉर्ड का अध्ययन करेगा।
- पक्षकारों की बात सुनेगा।
- आवश्यक होने पर अतिरिक्त साक्ष्य ले सकता है।
- यदि न्याय की मांग हो तो कुछ कार्यवाही दोहरा सकता है।
परन्तु वह बिना कारण पूरी कार्यवाही को पुनः प्रारम्भ नहीं करेगा।
Practical Example – 1
ABC Ltd. और XYZ Ltd. के बीच ₹25 करोड़ का Construction Dispute चल रहा था।
सभी गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी थी।
Award पारित होने से पहले Arbitrator का निधन हो गया।
अब नया Arbitrator नियुक्त किया गया।
नया Arbitrator रिकॉर्ड का अध्ययन करता है और आवश्यक सुनवाई के बाद Award पारित करता है।
उसे पूरी Evidence दोबारा रिकॉर्ड करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक न हो।
Practical Example – 2
एक Sole Arbitrator गंभीर बीमारी के कारण इस्तीफा दे देता है।
Agreement के अनुसार दोनों पक्ष सहमति से नया Arbitrator नियुक्त करते हैं।
नई नियुक्ति के बाद Arbitration वहीं से आगे बढ़ती है जहाँ पहले रुकी थी।
Practical Example – 3
Arbitrator को Section 12(5) के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया।
अब Section 15 के अनुसार नया Arbitrator उसी प्रक्रिया से नियुक्त किया जाएगा जिससे पहले की नियुक्ति हुई थी।
Section 15 और Section 14 में अंतर
| आधार | Section 14 | Section 15 |
|---|---|---|
| विषय | Mandate समाप्त होना | नया Arbitrator नियुक्त करना |
| उद्देश्य | Arbitrator को हटाना | Arbitration जारी रखना |
| परिणाम | पद समाप्त | Replacement |
| अगला चरण | Section 15 लागू | Proceedings आगे बढ़ती हैं |
Section 15 और Section 11 में संबंध
कई बार प्रश्न उठता है कि यदि पहला Arbitrator Section 11 के अंतर्गत Court द्वारा नियुक्त किया गया था, तो क्या Substitute Arbitrator भी Court ही नियुक्त करेगा?
सामान्य सिद्धांत यह है कि मूल नियुक्ति की प्रक्रिया का ही अनुसरण किया जाएगा।
यदि परिस्थितियाँ वही हैं जिनमें न्यायालय ने पहले नियुक्ति की थी, तो पुनः न्यायालय से अनुरोध किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
1. Yashwith Constructions (P) Ltd. v. Simplex Concrete Piles India Ltd. (2006)
सिद्धांत
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब किसी Arbitrator का Mandate समाप्त हो जाता है, तो सामान्य नियम यह है कि Substitute Arbitrator की नियुक्ति उसी प्रक्रिया से होगी जिससे मूल Arbitrator की नियुक्ति हुई थी।
महत्व
यह निर्णय Section 15(2) की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक व्याख्या माना जाता है।
2. TRF Ltd. v. Energo Engineering Projects Ltd. (2017)
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति स्वयं Arbitrator बनने के लिए अयोग्य है, वह Substitute Arbitrator भी नियुक्त नहीं कर सकता।
3. Perkins Eastman Architects DPC v. HSCC (India) Ltd. (2019)
यदि नियुक्ति की प्रक्रिया ही निष्पक्ष नहीं है, तो Substitute Arbitrator की नियुक्ति भी उसी दोष से प्रभावित हो सकती है।
4. Bharat Broadband Network Ltd. v. United Telecoms Ltd. (2019)
Section 12(5) के कारण Mandate समाप्त होने पर Substitute Arbitrator नियुक्त किया जा सकता है।
Drafting Tips
यदि आप Arbitration Clause तैयार कर रहे हैं, तो निम्नलिखित बातें अवश्य शामिल करें—
✅ Substitute Arbitrator की नियुक्ति की स्पष्ट प्रक्रिया।
✅ इस्तीफा, मृत्यु या अयोग्यता की स्थिति का प्रावधान।
✅ Proceedings जारी रखने का तरीका।
✅ Institutional Arbitration होने पर संबंधित Rules का उल्लेख।
✅ Delay रोकने हेतु समय-सीमा का प्रावधान।
Common Drafting Mistakes
❌ Replacement Clause का अभाव।
❌ Substitute Arbitrator की नियुक्ति का तरीका न लिखना।
❌ यह स्पष्ट न करना कि पूर्व कार्यवाही का क्या होगा।
❌ केवल Sole Arbitrator का उल्लेख करना, Replacement का नहीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यदि Arbitrator की मृत्यु हो जाए तो क्या पूरी Arbitration दोबारा शुरू होगी?
नहीं। सामान्यतः नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा और कार्यवाही जहाँ तक हुई है, वहाँ से आगे बढ़ाई जा सकती है।
क्या नया Arbitrator पुराने रिकॉर्ड का उपयोग कर सकता है?
हाँ। परिस्थितियों के अनुसार वह पूर्व रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और साक्ष्यों पर विचार कर सकता है।
क्या नया Arbitrator पुनः गवाही रिकॉर्ड कर सकता है?
यदि न्याय के हित में आवश्यक हो, तो वह ऐसा कर सकता है।
Substitute Arbitrator कौन नियुक्त करेगा?
सामान्यतः वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जिससे मूल Arbitrator की नियुक्ति हुई थी।
Judiciary & LLB Exam Notes
याद रखने योग्य तथ्य
- Section 15 → Termination of Mandate and Substitution.
- Replacement उसी प्रक्रिया से होगा जिससे पहली नियुक्ति हुई।
- Proceedings सामान्यतः पुनः प्रारम्भ नहीं होतीं।
- Yashwith Constructions (2006) Section 15 का प्रमुख निर्णय है।
- Section 14 के बाद सामान्यतः Section 15 लागू होती है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न
- Section 15 का उद्देश्य क्या है?
- Substitute Arbitrator किस प्रकार नियुक्त किया जाता है?
- क्या नए Arbitrator की नियुक्ति के बाद पूरी Arbitration पुनः प्रारम्भ होती है?
- Yashwith Constructions निर्णय का महत्व स्पष्ट कीजिए।
- Section 14 और Section 15 में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Section 15 Arbitration प्रक्रिया की निरंतरता सुनिश्चित करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण धारा है। यह स्पष्ट करती है कि Arbitrator के Mandate की समाप्ति का अर्थ यह नहीं है कि पूरी Arbitration विफल हो जाएगी। इसके विपरीत, कानून एक व्यवस्थित प्रक्रिया प्रदान करता है जिसके माध्यम से नए Arbitrator की नियुक्ति की जाती है और कार्यवाही यथासंभव उसी अवस्था से आगे बढ़ती है जहाँ वह रुकी थी। इस प्रकार Section 15 Arbitration की दक्षता, निष्पक्षता और व्यावहारिक उपयोगिता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Drafting Tips (Arbitration Clause Drafting)
एक प्रभावी Arbitration Clause भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि Clause स्पष्ट, संतुलित और कानून के अनुरूप तैयार किया जाए, तो Arbitrator की नियुक्ति, चुनौती या प्रतिस्थापन (Substitution) से जुड़े अधिकांश विवाद प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो सकते हैं। निम्नलिखित बिंदुओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए—
1. Arbitrator की योग्यता स्पष्ट लिखें
Arbitration Agreement में यह उल्लेख अवश्य करें कि Arbitrator के पास किस प्रकार की योग्यता या अनुभव होना चाहिए।
उदाहरण
कम से कम 10 वर्ष का Arbitration अनुभव।
Construction Contract का विशेषज्ञ।
Chartered Engineer / Advocate / Retired Judge।
इससे भविष्य में योग्यता संबंधी विवादों से बचा जा सकता है।
2. Appointment Procedure स्पष्ट रखें
यह स्पष्ट होना चाहिए कि Arbitrator की नियुक्ति कौन करेगा।
- Sole Arbitrator
- Three-Member Tribunal
- Institutional Arbitration
- Party Appointment
- Court Appointment
अस्पष्ट Appointment Clause आगे चलकर Section 11 की कार्यवाही का कारण बन सकती है।
3. Conflict of Interest Clause अवश्य जोड़ें
Agreement में यह स्पष्ट लिखा जाना चाहिए कि नियुक्त व्यक्ति Fifth Schedule एवं Seventh Schedule के अनुरूप स्वतंत्र और निष्पक्ष होगा तथा नियुक्ति स्वीकार करने से पूर्व आवश्यक Disclosure देगा।
4. Disclosure की बाध्यता लिखें
Clause में यह अवश्य जोड़ें कि Arbitrator नियुक्ति स्वीकार करने से पहले लिखित Disclosure देगा।
इससे बाद में Challenge की संभावना कम हो जाती है।
5. Replacement Clause शामिल करें
यदि Arbitrator—
मृत्यु हो जाए,
इस्तीफा दे,
अयोग्य हो जाए,
या Mandate समाप्त हो जाए,
तो नया Arbitrator किस प्रकार नियुक्त होगा, यह पहले से लिख देना चाहिए।
6. Seat और Venue अलग-अलग स्पष्ट करें
अक्सर लोग Seat और Venue को एक ही मान लेते हैं।
Seat न्यायिक अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction) निर्धारित करती है, जबकि Venue केवल सुनवाई का स्थान होता है।
7. Governing Law लिखें
यदि Contract अंतरराष्ट्रीय है, तो Governing Law तथा Curial Law दोनों स्पष्ट लिखें।
8. Language Clause जोड़ें
Arbitration किस भाषा में होगी, यह पहले से निर्धारित होना चाहिए।
9. Time Schedule निर्धारित करें
यदि संभव हो तो कार्यवाही की समय-सीमा भी निर्धारित करें।
10. Institutional Arbitration को प्राथमिकता दें
बड़े Commercial Contracts में SIAC, ICC, LCIA, MCIA अथवा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थागत नियमों का उल्लेख करना व्यावहारिक रूप से अधिक सुरक्षित माना जाता है।
Common Drafting Mistakes
निम्न त्रुटियाँ Arbitration Clause को विवादास्पद बना सकती हैं—
❌ Company Director को Arbitrator नियुक्त करने का अधिकार देना।
❌ केवल एक पक्ष को Arbitrator चुनने का पूर्ण अधिकार देना।
❌ Arbitrator की योग्यता का उल्लेख न करना।
❌ Replacement Procedure न लिखना।
❌ Disclosure Clause छोड़ देना।
❌ Seat एवं Venue को स्पष्ट न करना।
❌ Governing Law का उल्लेख न करना।
❌ Challenge Procedure पर कोई प्रावधान न रखना।
❌ Arbitration Institution का नाम स्पष्ट न लिखना।
❌ अस्पष्ट या विरोधाभासी Arbitration Clause तैयार करना।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. क्या Arbitrator नियुक्त होने से पहले Disclosure देना अनिवार्य है?
हाँ। Section 12 के अंतर्गत Arbitrator को ऐसी सभी परिस्थितियों का लिखित Disclosure देना अनिवार्य है, जिनसे उसकी निष्पक्षता या स्वतंत्रता पर उचित संदेह उत्पन्न हो सकता है।
2. Fifth Schedule और Seventh Schedule में क्या अंतर है?
Fifth Schedule संभावित Bias या Conflict of Interest की परिस्थितियों का उल्लेख करती है।
Seventh Schedule उन परिस्थितियों का उल्लेख करती है जिनमें व्यक्ति सामान्यतः Arbitrator बनने के लिए विधिक रूप से अयोग्य माना जाता है।
3. क्या किसी कंपनी का वर्तमान कर्मचारी Arbitrator बन सकता है?
यदि वह Seventh Schedule के अंतर्गत आता है, तो सामान्यतः नहीं।
4. क्या Arbitrator को हटाया जा सकता है?
हाँ।
यदि उचित आधार हो तो Sections 12, 13 एवं 14 के अनुसार Arbitrator को Challenge किया जा सकता है और आवश्यक होने पर उसका Mandate समाप्त किया जा सकता है।
5. यदि Arbitrator इस्तीफा दे दे तो क्या पूरी Arbitration समाप्त हो जाएगी?
नहीं।
Section 15 के अनुसार नया Arbitrator नियुक्त किया जाएगा और सामान्यतः कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
6. क्या Arbitrator की मृत्यु होने पर पूरी कार्यवाही दोबारा शुरू होगी?
आवश्यक नहीं।
नया Arbitrator परिस्थितियों के अनुसार पहले की कार्यवाही को अपनाकर आगे बढ़ सकता है।
7. क्या Challenge लंबित रहने पर Arbitration रुक जाती है?
नहीं।
यदि Tribunal Challenge अस्वीकार कर देता है, तो Arbitration जारी रहती है। अंतिम Award के बाद Section 34 के अंतर्गत न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
8. क्या Arbitrator स्वयं पद छोड़ सकता है?
हाँ।
स्वास्थ्य, व्यक्तिगत कारणों अथवा निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से वह इस्तीफा दे सकता है।
9. Substitute Arbitrator कौन नियुक्त करेगा?
सामान्यतः वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जिसके माध्यम से मूल Arbitrator नियुक्त किया गया था।
10. Sections 12–15 परीक्षा की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
क्योंकि ये Arbitrator की Independence, Challenge, Mandate तथा Replacement से संबंधित मूल प्रावधान हैं और लगभग सभी प्रमुख न्यायिक परीक्षाओं में इनसे प्रश्न पूछे जाते हैं।
Judiciary & LLB Exam Notes
One-Liner Revision
- Section 12 → Disclosure एवं Grounds of Challenge.
- Section 12(5) → Seventh Schedule के अंतर्गत अयोग्यता।
- Section 13 → Challenge Procedure.
- Section 14 → Failure or Impossibility to Act.
- Section 15 → Termination of Mandate & Substitute Arbitrator.
महत्वपूर्ण Case Laws
TRF Ltd. v. Energo Engineering Projects Ltd. (2017)
Principle
जो व्यक्ति स्वयं Arbitrator बनने के लिए अयोग्य है, वह किसी अन्य Arbitrator की नियुक्ति भी नहीं कर सकता।
Voestalpine Schienen GmbH v. DMRC (2017)
Principle
Arbitrator वास्तव में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होना चाहिए।
HRD Corporation v. GAIL (India) Ltd. (2018)
Principle
Fifth Schedule एवं Seventh Schedule के उपयोग का दायरा स्पष्ट किया गया।
Perkins Eastman Architects DPC v. HSCC (India) Ltd. (2019)
Principle
केवल एक पक्ष को Arbitrator नियुक्त करने का पूर्ण अधिकार देना निष्पक्षता के सिद्धांत के विपरीत हो सकता है।
Bharat Broadband Network Ltd. v. United Telecoms Ltd. (2019)
Principle
Section 12(5) एवं Seventh Schedule का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
Yashwith Constructions (P) Ltd. v. Simplex Concrete Piles India Ltd. (2006)
Principle
Substitute Arbitrator की नियुक्ति सामान्यतः उसी प्रक्रिया से होगी जिससे मूल Arbitrator नियुक्त हुआ था।
Memory Trick
12 – Tell → Disclosure बताओ।
13 – Challenge → Arbitrator को चुनौती।
14 – Remove → Mandate समाप्त।
15 – Replace → नया Arbitrator नियुक्त।
Flow Chart
Section 12Disclosure│▼Grounds of Challenge│▼Section 13Challenge Procedure│▼Challenge Accepted?│┌─────┴─────┐│ │Yes No│ │▼ ▼Section 15 Arbitration Continues│ │▼ ▼New Arbitrator
Previous Year / Expected Questions
Short Notes
- Disclosure Statement.
- Fifth Schedule.
- Seventh Schedule.
- Substitute Arbitrator.
Long Questions
- Section 12 का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
- Arbitrator को Challenge करने की प्रक्रिया समझाइए।
- Fifth Schedule एवं Seventh Schedule में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- Section 14 के अंतर्गत Mandate कब समाप्त होता है?
- Section 15 के अनुसार Substitute Arbitrator की नियुक्ति कैसे की जाती है?
- Perkins Eastman एवं TRF Ltd. निर्णयों का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Quick Revision Table
| Section | विषय | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| 12 | Disclosure एवं Challenge Grounds | Independence एवं Impartiality सुनिश्चित करना |
| 13 | Challenge Procedure | Arbitrator को चुनौती देने की प्रक्रिया |
| 14 | Failure or Impossibility | Mandate समाप्त करना |
| 15 | Substitution | नए Arbitrator की नियुक्ति एवं कार्यवाही जारी रखना |
Final Revision
यदि केवल पाँच बातें याद रखनी हों, तो इन्हें याद रखें—
✔ Arbitrator का Disclosure अनिवार्य है।
✔ Fifth Schedule = संभावित Bias।
✔ Seventh Schedule = विधिक अयोग्यता।
✔ Challenge पहले Tribunal के समक्ष किया जाता है।
✔ Mandate समाप्त होने पर सामान्यतः उसी प्रक्रिया से नया Arbitrator नियुक्त किया जाता है।
निष्कर्ष
Sections 12 से 15 Arbitration की निष्पक्षता और विश्वसनीयता का आधार हैं। इन धाराओं का सही ज्ञान न केवल LLB एवं Judiciary परीक्षाओं के लिए आवश्यक है, बल्कि अधिवक्ताओं, Arbitrators, कॉर्पोरेट विधि सलाहकारों और Contract Drafting करने वाले पेशेवरों के लिए भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। एक सुविचारित Arbitration Clause, समय पर Disclosure, उचित Challenge Procedure तथा स्पष्ट Replacement Mechanism भविष्य के अनेक विवादों को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त कर सकते हैं और Arbitration को वास्तव में एक प्रभावी Alternative Dispute Resolution (ADR) प्रणाली बना सकते हैं।

