RTI Act 2005 की 10 ज़रूरी धाराएँ | RTI Act Sections in Hindi (Complete Practical Guide)

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RTI Act 2005 की 10 ज़रूरी धाराएँ

(RTI Act sections in Hindi | Complete Practical Guide)

भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 आम नागरिक को सरकार से सवाल पूछने की संवैधानिक ताक़त देता है। लेकिन ज़्यादातर लोग RTI लगाते समय गलत धारा, अधूरा सवाल या गलत प्रक्रिया अपना लेते हैं—जिससे जवाब नहीं मिलता।

इस लेख में आप RTI Act 2005 की 10 सबसे ज़रूरी धाराएँ सरल हिंदी + प्रैक्टिकल उदाहरण के साथ समझेंगे, ताकि आपकी RTI कानूनी रूप से मज़बूत हो।


धारा 1 – अधिनियम का नाम व विस्तार

👉 यह अधिनियम पूरे भारत में लागू है (जम्मू-कश्मीर सहित)।
मतलब: आप देश के किसी भी राज्य/केंद्र के कार्यालय से RTI कर सकते हैं।


धारा 2(f) – “सूचना” की परिभाषा (सबसे अहम)

👉 सूचना में शामिल है:

  • दस्तावेज़

  • फाइल नोटिंग

  • आदेश/नियम

  • ईमेल

  • रिकॉर्ड, रजिस्टर, रिपोर्ट

राय, स्पष्टीकरण, अनुमान सूचना नहीं है।
✔️ रिकॉर्ड में मौजूद तथ्य ही माँगे जाएँ।

गलत सवाल: “क्यों कार्रवाई नहीं हुई?”
सही सवाल: “दिनांक ___ से ___ तक की कार्रवाई रिपोर्ट की प्रति दें।”


धारा 2(j) – सूचना पाने का अधिकार

👉 नागरिक को अधिकार है:

  • रिकॉर्ड देखने का

  • कॉपी पाने का

  • सैंपल/डाटा लेने का

📌 Tip: RTI में “अवलोकन (inspection)” शब्द जोड़ने से जवाब जल्दी मिलता है।


धारा 3 – कौन RTI लगा सकता है?

👉 हर भारतीय नागरिक RTI लगा सकता है।

  • गरीब / BPL

  • महिला

  • छात्र

  • ग्रामीण नागरिक

❌ विदेशी नागरिक RTI नहीं लगा सकते।


धारा 4 – स्वप्रकाशन (Proactive Disclosure)

👉 विभाग को पहले से ये जानकारी वेबसाइट/नोटिस बोर्ड पर डालनी चाहिए:

  • बजट

  • योजनाएँ

  • लाभार्थी सूची

  • अधिकारियों के नाम

📌 Tip: RTI से पहले वेबसाइट ज़रूर चेक करें—यही धारा 4 है।


धारा 6(1) – RTI आवेदन कैसे करें

👉 RTI लिखते समय:

  • कारण बताना ज़रूरी नहीं

  • सरल और बिंदुवार प्रश्न

  • संबंधित PIO को आवेदन

📌 यही धारा RTI का मूल हथियार है।


🔳 RTI Draft Box (धारा 6(1) के तहत)

सेवा में, लोक सूचना अधिकारी, ____________ विभाग विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत सूचना हेतु आवेदन। महोदय, कृपया निम्न सूचनाएँ प्रदान करने की कृपा करें: 1. दिनांक ___ से ___ तक ______ से संबंधित सभी आदेशों/कार्रवाई रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति। 2. संबंधित नियम/शासनादेश की प्रति। सूचना काग़ज़ी/डिजिटल रूप में प्रदान की जाए। भवदीय, नाम: पता: दिनांक:

धारा 7 – 30 दिन का समय-सीमा नियम

👉 PIO को 30 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य है।
❌ देरी = जुर्माना + अपील का अधिकार।

📌 जीवन/स्वतंत्रता से जुड़ा मामला: 48 घंटे


धारा 8 – कौन सी सूचना नहीं मिलेगी

👉 राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीयता, व्यक्तिगत सूचना (कुछ अपवादों को छोड़कर)।

📌 लेकिन: अगर जनहित बड़ा है तो सूचना मिल सकती है।


धारा 19 – First & Second Appeal

👉 जवाब न मिले या गलत मिले तो:

  • First Appeal – 30 दिन के भीतर

  • Second Appeal – सूचना आयोग

📌 यह धारा RTI को न्यायिक ताक़त देती है।


धारा 20 – PIO पर जुर्माना

👉 गलत/देरी से सूचना देने पर:

  • ₹250 प्रतिदिन

  • अधिकतम ₹25,000

📌 डरने की नहीं, कानून आपके साथ है


❓ RTI FAQs (ज़रूरी सवाल-जवाब)

Q1. क्या RTI ऑनलाइन कर सकते हैं?
हाँ, केंद्र और कई राज्यों में।

Q2. RTI में कारण लिखना ज़रूरी है?
नहीं।

Q3. क्या मोबाइल से RTI लिख सकते हैं?
हाँ, लेकिन स्पष्ट भाषा ज़रूरी है।

Q4. क्या RTI से FIR कॉपी मिल सकती है?
हाँ, FIR सार्वजनिक दस्तावेज़ है।

Q5. RTI में कितने सवाल पूछें?
5–8 स्पष्ट सवाल सबसे बेहतर।

इस हफ्ते सीखा:

  • RTI Act की 10 सबसे ताक़तवर धाराएँ

  • सही सवाल कैसे पूछें

अगले हफ्ते:
👉 RTI आवेदन लिखने की पूरी कला
👉 पुलिस, पंचायत और स्कूल से RTI

RTI Act 2005 Hindi PDF डाउनलोड करें


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