“गांव-शहर में रास्ता रोकना अवैध: जानें आपके अधिकार और कोर्ट के ताज़ा फैसले”

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क्या कहते हैं ताज़ा फैसले? — सम्पूर्ण लेख | IndianLawFact

गांव हो या शहर, रास्ता रोकने का विवाद सबसे आम और गंभीर कानूनी झगड़ों में से एक है।
अक्सर निजी दुश्मनी, पुरानी रंजिश या ज़मीन-सीमा विवाद के कारण पड़ोसी रास्ता बंद कर देते हैं। लेकिन हाल के कोर्ट के फैसलों ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि—

किसी व्यक्ति को उसके परंपरागत या आवश्यक रास्ते से रोकना कानूनन अवैध है और इसे अदालतें बहुत गंभीरता से लेती हैं।


1. वर्षों से चले आ रहे रास्ते को रोकना अपराध की श्रेणी में

यदि कोई रास्ता लंबे समय से चल रहा है, लोग लगातार उसी मार्ग से

  • खेत
  • घर
  • बाड़ी
  • कुएँ

तक आते-जाते रहे हैं,
तो अचानक उसे रोक देना Easementary Right (परंपरागत मार्ग अधिकार) का उल्लंघन है।

कोर्ट का सिद्धांत:

  • लगातार उपयोग से रास्ता कानूनी मान्यता प्राप्त कर लेता है।
  • ऐसे रास्ते को रोकना Civil Wrong + Criminal Act दोनों माना जा सकता है।
  • अदालतें ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करती हैं।


2. दीवार, गेट, रॉड, तार या वाहन से रास्ता रोकना — अवैध

अदालतों ने कई मामलों में कहा:

  • रास्ते पर दीवार बनाना
  • गेट लगाना
  • तार लगाना
  • टे्रक्टर/वाहन खड़ा करना
  • खूँटा/रॉड गाड़ना

ये सब कानूनन गलत हैं और रास्ता अवरुद्ध करने वाले के खिलाफ

  • सिविल कार्रवाई
  • एफआईआर

दोनों हो सकती हैं।

3. रास्ता साबित कैसे होता है?

कोर्ट क्रम से तीन मुख्य आधार देखती है—

(a) राजस्व नक्शा (Revenue Map)

जमीन का सरकारी नक्शा (खसरा/खतौनी/सीमा नक्शा) यह दिखा देता है कि कौन सा रास्ता पुराना/मान्य है।

(b) गवाह (Witness Evidence)

पड़ोसी, ग्राम प्रधान, आस-पास के लोग प्रमाण देते हैं कि रास्ता वर्षों से चलता था।

(c) लगातार उपयोग (Continuous Use)

यदि आवेदक यह दिखा दे कि वह लंबे समय से इसी रास्ते का उपयोग करता आया है, तो कोर्ट इसे Easementary Right मान लेती है।

➡ तीनों प्रमाण मिल जाएं तो अदालत तुरंत रास्ता खुलवाने का आदेश दे सकती है।


4. आपके कानूनी अधिकार क्या हैं?

यदि आपका रास्ता रोका गया है, तो आपके पास कई मजबूत कानूनी विकल्प हैं—

(1) Mandatory Injunction Suit (अनिवार्य निषेधाज्ञा वाद)

  • सिविल कोर्ट में वाद दाखिल करके
  • रास्ता तुरंत खुलवाने का आदेश (Mandatory Injunction) माँग सकते हैं।

(2) पुलिस में शिकायत

  • रास्ता रोकना शांति भंग, आपराधिक अतिक्रमण आदि अपराध हो सकता है।
  • पुलिस अवैध बाधा हटवाने की कार्रवाई कर सकती है।

(3) राजस्व विभाग में सीमांकन (Demarcation)

  • SDM/Tehsildar से सीमांकन कराकर
  • नक्शे के आधार पर रास्ता चिन्हित करवाया जा सकता है।

(4) अवैध निर्माण हटाने की कार्यवाही

  • कोर्ट आदेश के आधार पर
  • दीवार, गेट, तार आदि हटवाए जा सकते हैं।


5. कोर्ट का रुख क्यों इतना सख्त है?

क्योंकि रास्ता रोकना किसी व्यक्ति के

  • आवागमन का अधिकार,
  • जीवन-यापन,
  • कृषि कार्य,
  • व्यापार

पर सीधा प्रभाव डालता है।

भारत का Easements Act, 1882 भी स्पष्ट कहता है—

“किसी आवश्यक या परंपरागत रास्ते को अवरुद्ध करना अवैध है और प्रभावित व्यक्ति को न्याय पाने का पूर्ण अधिकार है।”


6. निष्कर्ष — रास्ता रोकना न तो कानूनी है, न ही नैतिक

यदि कोई व्यक्ति पुरानी रंजिश या दबंगई में रास्ता रोकता है,
तो कोर्ट ऐसे मामलों में

  • कठोर निर्देश,
  • तत्काल राहत,
  • अवैध निर्माण हटाने का आदेश

देने में बिल्कुल भी देरी नहीं करती।

रास्ता आपकी संपत्ति से जुड़ा मौलिक उपयोग अधिकार है।
इसे रोकना गंभीर उल्लंघन है।

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